कांग्रेस नेता अमित छाबड़ा बिन्नी मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल, रामलीला समिति ने किया सम्मानित

नवदुर्गा रामलीला में रावण के अत्याचारों और वेदवती प्रसंग का मंचन

जालंधर: नवदुर्गा रामलीला के मंच पर रावण के अत्याचारों, अहंकार और अधर्म का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों ने वेदवती प्रसंग से लेकर रावण को मिले वरदान और माता सीता के जन्म तक की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से धर्म, मर्यादा, सत्य और न्याय की शक्ति का संदेश दिया गया।

नवदुर्गा रामलीला में दिखाया गया वेदवती प्रसंग

नवदुर्गा रामलीला में रावण के अत्याचारों और वेदवती प्रसंग का मंचन

नवदुर्गा रामलीला के दौरान मंचित कथा में दिखाया गया कि कुशध्वज की पुत्री वेदवती जंगल में आती है। इसी दौरान वनगमन के लिए निकला रावण उसे देखकर गंधर्व विवाह का प्रस्ताव देता है। वेदवती रावण के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहती है कि उसने भगवान श्रीहरि विष्णु को अपना पति मान लिया है।

वेदवती के इनकार के बावजूद रावण जब उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास करता है, तो वेदवती अपने प्राण त्याग देती है और रावण को श्राप देती है कि भविष्य में वही उसके विनाश का कारण बनेगी। कलाकारों ने इस प्रसंग को प्रभावशाली संवादों और भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस दृश्य ने दर्शकों को अधर्म के परिणामों और नारी के आत्मसम्मान का संदेश दिया।

रावण के अत्याचारों और अहंकार का प्रभावशाली मंचन

कथा को आगे बढ़ाते हुए दिखाया गया कि रावण अपने मामा मारीच के साथ आगे बढ़ता है। कथा के अनुसार, भगवान शिव से उसे नाभि में अमृत और खड़्ग का वरदान प्राप्त होता है। इन शक्तियों को प्राप्त करने के बाद रावण का अहंकार बढ़ जाता है और वह देवताओं से कर वसूलने लगता है। जो देवता कर देने से इनकार करते हैं, उनसे वह रक्त के रूप में कर वसूल करवाता है।

नवदुर्गा रामलीला के मंच पर इस प्रसंग के माध्यम से रावण के अत्याचारी और अहंकारी स्वभाव को दर्शाया गया। कलाकारों की संवाद अदायगी और मंच सज्जा ने कथा को प्रभावशाली बनाया। दर्शकों ने धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए संदेश को सराहा।

नवदुर्गा रामलीला में रावण के अत्याचारों और वेदवती प्रसंग का मंचन

ऋषि-मुनियों के श्राप से जुड़ी माता सीता के जन्म की कथा

रामलीला में आगे दिखाया गया कि रावण के अत्याचारों से दुखी ऋषि-मुनि उसे श्राप देते हैं कि जिस स्थान पर वह उनके रक्त से भरा घड़ा रखेगा, वहां अकाल पड़ेगा। यह जानकर रावण उस घड़े को जनकपुर में जमीन के नीचे दबा देता है।

कथा के अगले भाग में इसी घड़े से माता सीता के जन्म से जुड़ा प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस दृश्य ने दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया। धार्मिक मान्यताओं और रामायण की कथा पर आधारित इस मंचन ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों तथा धर्म की महत्ता की याद दिलाई।

कांग्रेस नेता अमित छाबड़ा बिन्नी मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

नवदुर्गा रामलीला में रावण के अत्याचारों और वेदवती प्रसंग का मंचन

कार्यक्रम में कांग्रेस नेता अमित छाबड़ा बिन्नी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर नवदुर्गा रामलीला समिति के प्रधान डॉ. सीताराम, सुशील शुक्ला, महेंद्र राय और रमेश मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारियों ने उनका सम्मान किया।

कार्यक्रम के दौरान धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में रामलीला के महत्व पर जोर दिया गया। रामलीला जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नवदुर्गा रामलीला में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से मोहा मन

रामलीला के मंचन में राम सरदार, राजकुमार, अशोक पाल, विनोद प्रजापति, सुखदीप, जयदीप, रोहित, धर्मेंद्र, अभय, दीनदयाल, अमर, चिंटू, आशीष कुमार, पलट, भूपत भासनी, रामु प्रसाद और हरिराम प्रजापति सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

कलाकारों की प्रभावशाली अदाकारी, सशक्त संवादों और भावपूर्ण प्रस्तुति ने मंचन को जीवंत बना दिया। दर्शकों ने धार्मिक प्रसंगों का आनंद लिया और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

नवदुर्गा रामलीला का यह मंचन दर्शकों को संदेश देता है कि अहंकार, अन्याय और अत्याचार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में धार्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं को मजबूत बनाने में अहम योगदान देते हैं।

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