नई दिल्ली। बीबीएमबी बकाया भुगतान केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। इस दौरान भारत के एटॉर्नी जनरल ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच कई दौर की चर्चा के बाद तैयार किया गया प्रस्ताव अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।

एटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि प्रस्ताव के अनुसार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की बकाया राशि का भुगतान नकद के बजाय बिजली के रूप में किए जाने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को तैयार करते समय सभी कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार किया गया है ताकि लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान निकाला जा सके।

बीबीएमबी बकाया भुगतान केस पर हिमाचल और हरियाणा की सहमति

मुख्य न्यायाधीश ने प्रस्ताव पर सभी पक्षों से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। इस दौरान हिमाचल प्रदेश और हरियाणा सरकार ने प्रस्ताव पर सिद्धांततः सहमति जता दी। दोनों राज्यों ने माना कि इस व्यवस्था से विवाद के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ सकता है।

हालांकि पंजाब सरकार ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि इसमें हिमाचल प्रदेश पर पूंजीगत लागत (कैपिटल कॉस्ट) और संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) शुल्क से जुड़ी देनदारियों को शामिल नहीं किया गया है। पंजाब की ओर से दलील दी गई कि इन पहलुओं पर विचार किए बिना प्रस्ताव को स्वीकार करना उचित नहीं होगा और इस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

पंजाब की आपत्तियों पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में हिमाचल प्रदेश के पक्ष में डिक्री पहले ही पारित हो चुकी है और उसे लगभग 15 वर्ष बीत चुके हैं। अदालत ने संकेत दिया कि अब महान्यायवादी के प्रस्ताव को लागू कराने के संबंध में उचित निर्णय लेने पर विचार किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि जब पंजाब और हरियाणा ने स्वयं कभी भारत सरकार को पूंजीगत लागत का भुगतान नहीं किया, तो हिमाचल प्रदेश से ऐसी राशि की मांग करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संचालन एवं अन्य खर्चों को महान्यायवादी के प्रस्ताव में पहले से शामिल किया जा चुका है।

अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को अपने रुख पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि सहमति बनती है तो लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान संभव हो सकता है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 के लिए निर्धारित कर दी गई।

किशाऊ परियोजना से भी जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि बीबीएमबी बकाया भुगतान केस का संबंध केवल बकाया राशि तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले बीबीएमबी एरियर के मुद्दे को किशाऊ परियोजना से भी जोड़ते हुए हरियाणा के सामने कुछ शर्तें रखी थीं। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस रणनीति का हरियाणा पर प्रभाव देखने को मिला। अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी संबंधित राज्यों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे बीबीएमबी से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय और प्रशासनिक विवाद के समाधान की दिशा तय हो सकती है।

विज्ञापनIn-Article Ad · Responsive